सफर

1.3K Views
0 Replies
1 min read

सफर 

 

सफर का कारवां बढ़ता रहा 

समय का सफर भी गतिशील सा था

तन्हाइयों ने रास्ते में कंकड बो दिए थे

 रेगिस्तान की रेत सी जल रही थी वह

 पर उसका वहां पहुंच पाना मयस्सर ना हुआ 

वह उसके जज्बातों में घुलमिल गया था 

उसकी बातों की टकराहट में भी उसी का नाम गूंजता रहा एक सामान्य से सफर में जब से वह उसके साथ मिली उसका वह सफर जिंदगी का सफर बन गया 

जो हमसफर के साथ मंजिल की ओर बढ़ रहा था 

कठिन हालातों में भी वह उसी की यादों के सहारे जीता रहा एक उत्साही नाम था वह 

सुनते ही शरीर में ऊर्जा की लहर सी दौड़ जाती थी 

उसके साथ रहते हुए मिला वह अनुभव 

एक रहस्यमई संग्रह बन गया था उसके लिए 

जिसे खोने के अहसास भर से वह सिहर उठता था 

इन्हीं ख्यालों में खोया हुआ सफर आगे बढ़ रहा था 

एक रोज मंजिल भी हासिल हुई उसे

मगर उसके साथ नहीं उसकी यादों के सहारे 

जो मात्र कल्पना थी उस सफर के लिए

 

 

0 Replies

No Replies Yet

Topic Author

R

Ramesh Kumar

@Ramesh Lalwani

Topic Stats

Created Tuesday, 26 April 2022 15:17
Last Updated Tuesday, 26 April 2022 15:18
Replies 0
Views 1.3K
Likes 0

Share This Topic